Ayodhya Ram Mandir Donation Theft !
( As of now it seems that Shree Champat Rai (श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव General Secretary of Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust) though not personally involved in theft, he could not do justice to his responsibility to make the system fool proof to prevent any possible theft ! He has resigned from his post on moral grounds to ensure impartial investigation of the matter by SIT even as people are demanding his resignation labelling him big fish and are also asking for his arrest not being satisfied by his resignation. )
किसी के द्वारा दिए गए धातु की ईंट की रसीद चाँदी या सोना मानकर नहीं दी जा सकती, जबतक कि उसकी जांच न हो। आप मुझे गिल्ट की मिलावट वाली ईंट पकड़ा जाएं और मैं आपको चांदी की ईंट लिखकर रसीद दे दूं,,, तो कल को मुझ पर यह आरोप लगेगा कि तुमने चांदी की ईंटें ली थीं और बाद में यह तुमने बदलकर मिलावट वाली रख दी! दो, मैं आपसे दान में डुप्लीकेट वस्तु लेके आपको शुद्ध धातु की रसीद कैसे दे दूं? मैं कहां से साबित करूंगा बाद में कि यह शुद्ध धातु है?
इसलिए धातु के दान पर कोई भी रसीद नहीं दे सकता आपको। आपमें श्रद्धा है तो दान दो, वरना ना दो, किसी ने जबरदस्ती नहीं मांगा आपसे।
इसके लिए सही विकल्प यही होता है कि जो भी धातु के रूप में ईंटें या बिस्किट/बार आपको दे रहा है… उसको पिघलाओ,,, और जो शुद्ध धातु निकले उसको बार में तब्दील करके फिर अपने लॉकर रूम में रखो। सिन्धी समाज द्वारा जो ईंटें दान की गईं थी उसके साथ भी वही प्रक्रिया का पालन किया गया है। SBI बैंक द्वारा उन सारी चांदी की ईंटों को पिघलाया गया, पिछलने के बाद उसकी शुद्धता की जांच हुई, और उसमें से जो भी शुद्ध धातु निकली उसको वापिस से ईंट/बार में बदलकर अपने लॉकर रूम में रख लिया गया सुरक्षित।
SIT जांच में भी यही पाया गया है जो भी मंदिर में धातु/आभूषण दान में मिले थे वह सभी सुरक्षित पाए गए और उनको रिकॉर्ड में दर्ज किया जा रहा है मिलान करके। मीडिया में बताए जा रहे चांदी के फूल भी सुरक्षित पाए गए और तथाकथित चांदी के काकभुशुण्डि भी।
• हां जो गड़बड़ी हुई थी, वो दान पेटी के नोटों में हुई थी… जोकि भ्रष्ट सेवादारों द्वारा की गई थी। दान पेटी से मिले नोट अपने जेब में डालते हुए जो पकड़े गए हैं CCTV में।
चंपत राय जी के बारे में जो जांच में पाया गया है कि उनकी नीयत में कोई खोट नहीं मिला, पर प्रबंधन उनका बुरा था, जिस स्तर का ये मंदिर है, जिस स्तर में यहां चढ़ावा आता है, उस स्तर का मैनेजमेंट नहीं वह रख पाए। और निचले कर्मचारियों पर वैसी निगरानी नहीं रख पाए।
फिर भी श्रद्धालुओं की विश्वास बहाली के लिए चंपत राय जी को स्वयं ट्रस्ट से त्यागपत्र दे देना चाहिए।
( Deoratna Goel in Inbook )
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चंपत राय और अनिल मिश्रा ने दिया इस्तीफा... चंदा चोरी विवाद के बीच राम मंदिर ट्रस्ट छोड़ा
अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित गड़बड़ी के मामले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है. श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य चंपत राय और अनिल मिश्रा ने अपने पद से इस्तीफा सौंप दिया है. यह इस्तीफा नैतिकता के आधार पर दिया गया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त रुख और एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद यह फैसला लिया गया.
राम मंदिर दान प्रकरण में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त रुख का असर साफ देखने को मिला है. राम जन्मभूमि ट्रस्ट के दो सदस्य चंपत राय और अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दे दिया है. एसआईटी की शुरुआती रिपोर्ट में कठोर संस्तुति के बाद यह बड़ा फैसला लिया गया. एसआईटी की सिफारिश पर मामले में पहली एफआईआर पहले ही दर्ज की जा चुकी है. इस्तीफों को जांच में हुई कार्रवाई से जोड़कर देखा जा रहा है.
सूत्रों के अनुसार, यह घटनाक्रम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त रुख और एसआईटी की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के बाद सामने आया है. इससे पहले इसी मामले में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की शिकायत पर पहली एफआईआर दर्ज की गई. एफआईआर में आठ लोगों को नामजद किया गया है, जबकि कई अन्य अज्ञात लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है.
एसआईटी फिलहाल कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच कर रही है. जांच एजेंसी आरोपियों के बैंक खातों, संपत्तियों, मोबाइल रिकॉर्ड और कथित लेन-देन की पड़ताल में जुटी है. सूत्रों का कहना है कि एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट में कुछ कड़ी सिफारिशें की गई थीं, जिसके बाद जांच की रफ्तार और तेज हुई.
PMO ने राम मंदिर ट्रस्ट से मांगा था चंदे का हिसाब, चंपत राय ने जांच का हवाला देकर कर दिया इनकार
इसी क्रम में चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफों को भी जांच से जोड़कर देखा जा रहा है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही इस मामले में पारदर्शी और निष्पक्ष जांच के संकेत दे चुके हैं. सरकार का कहना है कि यदि जांच में किसी भी स्तर पर अनियमितता या जिम्मेदारी तय होती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी.
फिलहाल इस पूरे मामले में कई सवालों के जवाब अभी आने बाकी हैं. क्या एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट में और बड़े खुलासे होंगे? क्या जांच का दायरा और बढ़ेगा? और क्या ट्रस्ट की कार्यप्रणाली में कोई बदलाव देखने को मिलेगा? इन सभी सवालों के जवाब आने वाले दिनों में जांच के साथ सामने आएंगे.
चढ़ावे से जुड़े मामले में 8 लोगों के खिलाफ दर्ज हुआ है केस
राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित गड़बड़ी की जांच के बीच गुरुवार को बड़ा कदम उठाया गया. श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ट्रस्टी कृष्ण मोहन की शिकायत पर राम जन्मभूमि थाने में आठ लोगों के खिलाफ केस दर्ज हुआ. एफआईआर में राम शंकर यादव उर्फ टीनू, अनुकल्प मिश्र, लवकुश मिश्रा, करुणेश पांडेय, अविनाश शुक्ला, मनीष यादव, रमाशंकर मिश्रा और सुभाष चंद्र श्रीवास्तव को नामजद किया गया है.
इनके खिलाफ गबन, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश से जुड़ी धाराओं के तहत मामला दर्ज है. सूत्रों के अनुसार, एसआईटी की शुरुआती रिपोर्ट अपर मुख्य सचिव (गृह) को सौंपे जाने के बाद यह कार्रवाई हुई. पुलिस ने अब तक चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि अन्य की तलाश की जा रही है.
ट्रस्ट से जुड़े कृष्ण मोहन ने दर्ज कराई है मामले की शिकायत
इस पूरे मामले की शिकायत कृष्ण मोहन ने दर्ज कराई, जो सितंबर 2025 में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का सदस्य बनाया गया था. फरवरी 2025 में ट्रस्टी कामेश्वर चौपाल के निधन के बाद उनकी जगह कृष्ण मोहन का चयन किया गया. हरदोई के रहने वाले कृष्ण मोहन ने 1970 के दशक में लखनऊ विश्वविद्यालय से एमएससी की पढ़ाई की थी. इसके बाद उन्होंने परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में करीब छह वर्ष तक काम किया और फिर भारतीय वन सेवा (IFS) में चयनित होकर महाराष्ट्र कैडर में सेवाएं दीं. साल 2012 में रिटायर होने के बाद वह सामाजिक कार्यों से जुड़े रहे.
पहले विश्व हिंदू परिषद, फिर ट्रस्ट से जुड़े थे चंपत राय
चंपत राय विश्व हिंदू परिषद (VHP) के वरिष्ठ नेता रहे हैं. उन्होंने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव पद से इस्तीफा दिया है. राम मंदिर आंदोलन के शुरुआती दौर से लेकर मंदिर निर्माण और उसके संचालन तक उनकी भूमिका मानी जाती रही है. ट्रस्ट के प्रशासनिक कामकाज, वित्तीय प्रबंधन, भूमि संबंधी मामलों और मंदिर की दैनिक व्यवस्थाओं की निगरानी की जिम्मेदारी उनके पास थी. सूत्रों के मुताबिक, जांच में यह भी सामने आया है कि मंदिर संचालन से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय और सूचनाएं उनके स्तर तक पहुंचती थीं. वहीं, उनके करीबी और ड्राइवर रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव श्रद्धालुओं की दर्शन व्यवस्था के साथ-साथ चढ़ावे और दान से जुड़ी व्यवस्थाओं को संभालते थे.
लंबे समय से संघ से जुड़े रहे अनिल मिश्रा
डॉ. अनिल मिश्रा अयोध्या के सीनियर डॉक्टर हैं और लंबे समय से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े रहे हैं. वह श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के संस्थापक ट्रस्टियों में शामिल रहे. ट्रस्ट के भीतर उन्हें मंदिर में आने वाले चढ़ावे की कैश की गिनती, उसके सुरक्षित भंडारण और बैंक में जमा कराने की व्यवस्था की निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई थी. सूत्रों के अनुसार, मंदिर परिसर की साफ-सफाई और कुछ अन्य व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी भी उनके कार्यक्षेत्र में शामिल थी.
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विजय नड्डा 's post !
अब कौन त्याग व तपस्या का मार्ग अपनाएगा!
उच्च शिक्षा (भौतिक विज्ञान में स्नातकोत्तर डिग्री हासिल कर महाविद्यालय में प्रोफेसर पद ) प्राप्त करके ( आज के लगभग पचपन वर्ष पहले जब हाई स्कूल पास करना बड़ी बात थी) समाज, धर्म और देश के लिए अविवाहित रह जीवन समर्पित करने वाले लोगों के लिए यदि अफ़वाहो को आधार बनाकर यदि ये समाज यह रूख अपनाएगा तो कौन इस तपस्या के मार्ग पर अग्रसर होगा।?
माननीय चंपत राय जी , माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी, पूजनीय मोहन भागवत जी और अनेकों आदरणीय लोग जो संत भले न दिखे लेकिन इन्होंने अपने जीवन को एक संत से बढ़कर राष्ट्र सेवा में समर्पित कर दिया।
चंपत राय जी 81 वर्ष के है ( मेरे लैप टॉप में उनकी कुंडली सेव है वो कर्मवादी योगी है जो भाग्य विचार के बहुत पक्ष में नहीं रहते है और इधर मेरी उनसे आखरी मुलाकात १४ जनवरी को मेरे छोटी देवकाली कार्यालय के उद्घाटन पर हुई थी और मुझे ठीक से याद है कि मैंने उन्हें उनके मार्केश की सूचना दी थी लेकिन उन्होंने उसे गंभीरता से सुना तो लेकिन फिर इस के उपाय करने का अवसर नहीं पाए, ग्रह जब प्रबल होते है तो उपाय भी नहीं करने देते. . . यहाँ भी यही हुआ)
हालाकि मेरी उनसे प्रथम व्यक्तिगत भेंट श्री राम जन्मभूमि मंदिर में श्री राम परिवार की प्राण प्रतिष्ठा के मुहूर्त के दौरान हुई थी अभी पिछले वर्ष ही और मैंने पाया कि ये बिना किसी स्वार्थ के दिन रात सिर्फ व सिर्फ भगवान श्री राम जी के लिए ही समर्पित है।
यदि मैंने उनको व्यक्तिगत ना जान रहा होता तो मैं भी चंपत राय जी बारे में शायद यही सोच रहा होता जैसा की इस समय उनके बारे मे कुप्रचार हो रहा है!
मैं इस बात से पूरी तरह सहमत हूँ कि मंदिर के दान में चोरी हुई होगी !
और इसकी जाँच संपूर्ण परिदर्शीता के साथ CBI, SIT इत्यादि द्वारा किया जाना चाहिए ।
लेकिन पूरा मामला ये है कि …
एक ट्रस्ट बना और मंदिर निर्माण की प्रक्रिया शुरू हुई!
प्रायः ट्रस्ट में निष्क्रिय सदस्यों की नियुक्ति अधिक संख्या में हो गई !
और पूरे ट्रस्ट का सारा काम काज सुलभता से उपलब्ध और मेहनत करने के अभ्यस्त चंपत राय जी और डॉक्टर अनिल मिश्रा जी पर दबाव की तरह बढ़ता ही गया!
अस्वस्थ होने के बावजूद डॉक्टर अनिल मिश्रा जी व उम्र की सीमा को भूल अत्यंत सादगी पूर्वक सेवा करने में दिन रात लगे हुए चंपत भाई साहब को देख मैं उनसे प्रभावित हुआ, प्रभु श्री राम जी से उनका जुड़ाव मेरे उनसे प्रभावित होने का आधार है।
मैं जल्दी किसी से प्रभावित नहीं होता बल्कि कई मामलो पर मैंने अपनी असहमति जताई जैसे मैं श्री राम परिवार को दूसरे तल की जगह कहीं ऐसे जगह स्थापित करने के पक्ष में हूँ जहाँ सभी लोग दर्शन प्राप्त कर सकें और कोई भी दर्शन पास की ज़रूरत ना हो ऐसा इसलिए की सभी को उतनी उचाई पर दर्शन कराना संभव नहीं है वहाँ जगह कम है ये बात मैंने दोनों लोगो से कही थी और शायद इस पर ध्यान भी दिया जा रहा था।
अचानक प्रबंधन से कोई रिश्ता नहीं रखने वाले हमारे दो वरिष्ठ अचानक इतनी बड़ी जिम्मेदारी तले आ गए और संघ की शिक्षा के अनुसार आ पड़ा काम उन्हें करना ही था। तो वो जुट गए और जैसा उनका अनुभव था वैसा उन्होंने किया , हर व्यक्ति अपने विश्वस्त सहयोगियों को ही काम सौपते है तो इन्होंने भी यही किया लेकिन दस हजार पर कार्य करने वाले लोगों को इन्होंने करोड़ों अरबों की संपत्ति की देखभाल करने की ज़िम्मेदारी देने का अपराध कर दिया!
यही इल्ज़ाम अब …
देखे कहाँ तक जाता है ।
लेकिन इस पर वो बाबा भारती की कहानी याद आ रही है…
यह कहानी प्रसिद्ध हिंदी कथा 'हार की जीत' है, जिसे सुदर्शन जी ने लिखा था।
इसमें बाबा भारती के पास एक बहुत ही सुंदर घोड़ा होता है जिसे 'सुल्तान' कहते हैं। डाकू खड्ग सिंह उस घोड़े पर मोहित होकर धोखे से उसे ले जाता है, लेकिन बाबा भारती कहते हैं कि इस बात को किसी को बताना नहीं, क्योंकि लोग असहायों की मदद करना छोड़ देंगे।
इसी तरह अपनी पूरी उम्र की सेवा का ये हश्र देख हमारा ये बुजुर्ग ना जाने कितनी पीड़ा में होंगे ।
भाई बाक़ी ट्रस्टी ( जिसमें जिला अधिकारी अयोध्या तक आते है) कुछ भी नहीं कर रहे थे इसलिए उन पर कोई इल्ज़ाम भी नहीं है !
जो कुछ करेगा तो गलती भी उसी के नाम आएगी तो ऐसे तो विकास ही नहीं होगा।
आख़िर कोई तो शिव बन हलाहल भी पियेगा।
यदि इन जैसे लोगों के हाथों मंदिर ठीक नहीं है तो फिर ये किन लोगों के हाथ में सुरक्षित होगा ?
मैं भी पूरा देश घुमा करता हूँ और हर जगह मंदिर ही जाता हूँ अभी तक तो श्री राम भूमि जैसी कोई व्यवस्था तो मिली नहीं ।
श्री त्र्यम्बकेश्वर महादेव के दर्शन करने के बाद पंचवटी में प्रवास है।
ईश्वर से प्रार्थना है कि दोषी बचने ना पाए और किसी भी निर्दोष पर आँच ना आए।
चंपत भाई साहब तो पहले उठे आरोपों से यूँ ही मन ही मन घबराए हुए से रहते थे एक असुरक्षा का भाव सदा उनके साथ था ऐसा मैंने महसूस किया था और फिर अब वे इस धोखे का शिकार हुए।
इस उम्र के इस पड़ाव पर ये अपयश लेकिन यदि सोने की प्रतिमा कीचड़ में गिर जाए तो भी उसका मूल्य कम नहीं होता मेरा पूर्ण विश्वास है कि सत्य परेशान हो सकता है लेकिन पराजित नही।
हर हर महादेव!
जय श्री सीताराम !
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