इस लेख के माध्यम से कोरोना मामले पर जजों के साथ सुनवाई कर रहे बेंच के प्रमुख जस्टिस चंद्रचूड़ के सामने कुछ सवाल के जवाब की जरुरत है।
कुछ अदालतों के न्यायाधीश भद्दी और तल्ख़ टिप्पणी कर रहे हैं खासकर जस्टिस सांघी की टिप्पणी का जिक्र किया था जिसमे उन्होंने सरकार से कहा था - भीख मांगो,
उधार लो या चोरी करो --
अगले दिन ASG तुषार मेहता ने ये मसला आपकी बेंच के सामने उठाया तो आपने कहा कि हर स्तर पर संयम
होना चाहिए -
लेकिन चुनाव आयोग के बारे में मद्रास हाई कोर्ट की टिपण्णी को, जिसमे आयोग को कोरोना का दोषी और लोगों का हत्यारा कहा गया, आपने कड़वी दवा बता कर सही ठहरा दिया मतलब संयम की बात ख़तम हो गई --
मद्रास हाई कोर्ट को सही ठहराते हुए एक बात भूल गए कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है, ना कि कोई
बड़भूजे की दुकान --मद्रास हाई कोर्ट स्वयं भी पूरे चुनाव प्रचार में चुप बैठा रहा, जो उसे खुद को भी दोषी ठहरता है --
कोर्ट केंद्र से कहा कि 4 दिन में ऑक्सीजन का बफर स्टॉक तैयार करो 15 दिन में राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति तैयार हो और किसी अस्पताल में आधार कार्ड के बिना मरीज के दाखिल करने पर मनाही ना हो --
अस्पतालों में मरीज भर्ती करने के लिए राज्य भी कुछ करेंगे या नहीं -- इतने शीघ्र आदेशों के पालन कराने के हुकुम देते हुए कभी ये भी विचार हो जाना चाहिए कि कितने कितने सालों से अदालतों में मुक़दमे लंबित पड़े हैं।
राष्ट्रीय नीति पर राज्य सरकारें अमल नहीं करेंगी तो क्या होगा -कुछ उदहारण जिनमे राज्यों ने क्या गुल खिलाये।
1_ आयुष्मान भारत योजना गरीबों को 5 लाख का इलाज देने वाली योजना 2018 में केंद्र ने शुरू की --दिल्ली ने इसे मार्च, 2020 में लागू किया, बंगाल,ओडिशा और तेलंगना ने लागू नहीं की - इन राज्यों में लागू करवाएंगे क्या ?
2 _ संसद से पारित CAA कानून को लागू करने के लिए 7 राज्यों ने मना कर दिया और अभी तक सुप्रीम कोर्ट ने इस पर कोई फैसला नहीं दिया है क्या संसद के कानून का राज्य ऐसे मखौल उड़ा सकते हैं।
3 _ कृषि कानून भी संसद ने पारित किये थे जिनके खिलाफ आपकी अदालत कथित किसानो को 120
दिनों से सड़कों पर बैठ कर सबको परेशान करने की अनुमति दिए हुए हैं उनका हिंसक तांडव देखते रहे 26 जनवरी को और अब उन्हें गैर कानूनी पक्के घर बनाने के लिए इज़ाज़त दे रही हैं।
4 _ देश के 8 राज्यों ने केंद्रीय जांच एजेंसी CBI के लिए अपने दरवाजे बंद कर दिया और उनकी इस हरकत को आपकी अदालत ने सही करार दिया हुआ है क्या खुल
कर भ्रष्टाचार करने की अनुमति दी गई है इस तरह -
5 _ आज सुप्रीम कोर्ट समेत कई हाईकोर्ट कोरोना को लेकर स्वतः संज्ञान लिए हुए सुनवाई कर रहे हैं मगर कोलकत्ता हाई कोर्ट 2 दिन से बंगाल में हो रहे हिंसा के तांडव को खामोश देख रहा है --
आपका कोर्ट भी 5 साल ममता के तांडव को आँखे बंद करके देखता रहा, कभी स्वतः संज्ञान ले कर कार्रवाई नहीं की लेकिन यदि राष्ट्रपति शासन लग जाता तो दिन रात एक हो जाते अदालत में ??