कश्मीर घाटी के हिंदुओं को नरसंहार पर बनी विवेक रंजन अग्निहोत्री की फिल्म The Kashmir Files रोज नए कीर्तिमान गढ़ रही है, साथ ही लोगों के अंदर गुस्सा और बेचैनी को भी बढ़ा रही है। वहीं, इस फिल्म के सह-लेखक सौरभ पांडेय ने कहा कि इसमें सिर्फ 5 प्रतिशत घटनाओं को ही दिखाया गया है। उन्होंने कहा कि बाकी की घटनाएँ ना दिखाई जा सकती हैं और ना ही देखा जा सकता है। उन्होंने बताया कि इस सच्चाई को पर्दे पर लाने में तीन साल की मेहनत और रिसर्च लगा है।सौरभ पांडेय ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कहा कि बचपन से सुना था कि कश्मीर स्वर्ग है, लेकिन वह नरक से गंदा है। उन्होंने कहा कि फिल्म में वहाँ की सारी घटनाएँ ना ही कही जा सकती है और ना ही दिखाई जा सकती है, क्योंकि उसे बोलने मे भी शर्म आएगी और सुनने में भी शर्म आएगी।सौरभ ने कहा कि इस फिल्म के लिए लगभग 700 इंटरव्यू किए गए। जितनी किताबें मिलीं, उन्हें पढ़ा। उनकी गिनती नहीं की, लेकिन 15 से 20 किताबें जरूर पढ़ी होंगी। न्यूज और आर्टिकल निकालकर जानकारियाँ जुटाई गईं। कश्मीरी लोगों के साथ क्या हुआ था, इसकी जानकारी हासिल की गई। इसके बाद स्क्रिप्टिंग पर काम शुरू किया गया। कुल साढ़े तीन साल रिसर्च करने और स्क्रिप्ट लिखने में लगा।सौरभ ने कहा कि इस फिल्म के लिए लगभग 700 इंटरव्यू किए गए। जितनी किताबें मिलीं, उन्हें पढ़ा। उनकी गिनती नहीं की, लेकिन 15 से 20 किताबें जरूर पढ़ी होंगी। न्यूज और आर्टिकल निकालकर जानकारियाँ जुटाई गईं। कश्मीरी लोगों के साथ क्या हुआ था, इसकी जानकारी हासिल की गई। इसके बाद स्क्रिप्टिंग पर काम शुरू किया गया। कुल साढ़े तीन साल रिसर्च करने और स्क्रिप्ट लिखने में लगा।सौरभ ने बताया कि टीम पीड़ितों, उनके परिजनों, पड़ोसियों और जो बातचीत के लिए तैयार थे, उनसे मिलने के लिए जम्मू, दिल्ली, मुंबई, कनाडा, अमेरिका, जर्मनी गए। उन्होंने कहा कि जहाँ-जहाँ कश्मीर से लोग गए हैं, वहाँ जाकर टीम ने उनका इंटरव्यू लिया और विस्तार से जाना कि उनके साथ दरअसल हुआ क्या था।एक घटना को याद करते हुए सौरभ बताते हैं कि फिल्म में नाडरमर का एक एक्सीडेंट है, जिसे पढ़कर शॉक लगा था। जब उनका इंटरव्यू करने गए, तब वे अपने परिवार का इकलौता बच्चा थे और बच गए थे। घटना के दिन उनके दादाजी जम्मू जाने वाले थे, लेकिन दादाजी की जगह वह चले गए और बच गए। आज भी उन्हें देखकर लगता है कि वह कोमा से बाहर नहीं निकल पाए।सौरभ ने बताया कि इस फिल्म का आइडिया विवेक अग्निहोत्री का था। विवेक अग्निहोत्री के साथ वह ताशकंद फाइल्स में भी काम कर चुके हैं। उसमें वह रिसर्चर और स्क्रिप्ट सुपरवाइजर का काम देखते थे। उनका काम देखकर उनसे कश्मीर फाइल्स पर काम करने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि कश्मीर में उस दौरान सड़कों पर महिलाओं से बलात्कार हुए और बच्चों की आँखों में गोली मारी गई।बता दें कि फिल्म के निर्देशक विवेक अग्निहोत्री ने कहा कि लोग इस फिल्म को कम आँक रहे थे। उन्होंने कहा कि वे जल्दी ही इसकी सीरीज बनाने का काम शुरू करेंगे।