Anupama Jain's Album: Wall Photos

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तुम समंदर मै नदी हु 

तुम गहरे शांत मै चंचल बहती रहती हु 

 

 

मै जन्म लेती ही मर्यादा मै बंधी

धीरे धीरे अपने रूप को बढ़ाने लगी  

उफान मुझे भी आता है तब मै बाढ़ लाती हु  

सब तबाह कर जाती फिर भी मै जीवनदायनी कहलाती हु   

मुझसे खेत लहलहाए शहरों को मै बसती हा मै नदी हु

 

 

तुम समंदर मै नदी हु 

तुम गहरे शांत मै चंचल बहती रहती हु 

 

 

तुम समंदर शांत गहरे सब कुछ सामने की शक्ति है

पर तुमपर न तो बांध बने न नहर निकली जाती है

तुम अगाध तुम शांत पर गुस्सा तुमको भी आता है

जब छोड़ते हो तुम मर्यादा सब कुछ तबाह कर जाते हो

जो तुमको चाहिए वो तुम पा जाते हो

 

 

 

तुम समंदर मै नदी हु 

तुम गहरे शांत मै चंचल बहती रहती हु 

 

 

 

पर फिर भी मै नदी मेरा मेरा अंत तुम्हारी शुरुवात है

तुम मै जिसका विलय हुआ वो मेरा ही आगाज है

सैकड़ो नदी समा जाती तुम में खुद को खत्म कर तुम्हारी हो जाती है

गंगा नर्मदा सिंधु ताप्ती कोई भी नाम हो मिल कर सागर की होजाती है

अपना अस्तित्व खो जाता है नदी जब तुमसे मिले आती है

 

तुम समंदर मै नदी हु 

तुम गहरे शांत मै चंचल बहती रहती हु 


अनुपमा जैन