शादी को कुछ ही समय हुआ था और आज कामवाली भी नही आई इसलिये शीलू बरतन धोने लगी। धोते धोते उसके हाथ से कॉच का कप नीचे गिरकर टूट गया।
कप टूटते ही वह डरने लगी कि उसकी सास अब जली कटी सुनायेगी। आवाज से सास दौड़ती आई और बोली, बेटी क्या हुऑ? उसने रुआँसी होकर बोला- मॉ, पता नही ध्यान रखते हुये भी कैसे मेरे हाथ से कप नीचे गिरकर फूट गया।
सास बोली कि बेटी चिंता नही कर, कप ही तो फूटा है। तुम्हें चोट तो नहीं आयी और भले इसके कितने ही टुकड़े हो गये हो पर मेरी बेटी के दिल के टुकड़े ना हो।
मेरी बहू से महँगा क्या ये कप है? और हॉ, तुझे अभी ये सब करने की क्या जरूरत, मेहंदी भी नही उतरी तेरे हाथो से।
अभी तुम राज के साथ ज्यादा से ज्यादा वक्त बिताओ और एक दूसरे को समझो तभी तो तुम दोनो की नींव मजबूत होगी।
ज्योति इधर आना, अपनी भाभी का ख़्याल रख, अभी इस घर मे नई आई है । शीलू, तुम मुझे अपनी मॉ ही समझना।
मुझे भी तुम्हारा दिल जीतना है सास बनकर नही मॉ बनकर।
शब्द क्या मानो अमृत के घूँट थे।
देखते देखते शीलू की ऑंखो छलछला गई। वह सास के पैरों मे गिर गई और बोली कि मैंने एक मॉ छोड़ी तो दूसरी नई मॉ पाई, बल्कि आप मेरी मॉ से भी ज्यादा ममता मेरे लिये रखती हो।
यदि घर मे कप टूट जाता तो मॉ भी दो बात कहे बिना नही रहती ।
रात को शीलू की नींद ही उड़ गई, रह रहकर शाम की घटना याद आ रही थी।
सास के बारे मे उसकी जो सोच थी उससे विपरित सास का व्यवहार पाया। उसका भी क़सूर नही था ऐसा सोचना क्योंकि उसने लोगो के मुँह से बुरी सास के बारे मे ही सुना था और फिर वो अपने अतीत में खो गई।
उसे याद आया कि कुछ साल पहले इकलौते भइया की शादी हुई थी। भाभी की हाथो से मेहंदी का रंग उतरने से पहले ही मॉ ने भाभी पर घर के काम की पूरी ज़िम्मेदारी डाल दी और अपने ही नियम कानून के हिसाब से भाभी को चलने को विवश करती।
मॉ ने भाभी को घर मे एडजस्ट होने मे ज़रा भी वक्त नही दिया। भइया भाभी को बाहर ले जाते तो मॉ का मुँह फूल जाता व बोलती कि हर समय भाभी को साथ ले जाने की कहॉ जरूरत है।
कभी भी भाभी को खुली हँसी हँसते नही देखा। समय के साथ भाभी ने सहना छोड़ दिया फिर हर रोज घर में झगड़ा होने लगा।
एक दिन भाभी के हाथ से कॉच का गिलास नीचे गिरकर टूट गया। मॉ चिल्लाने लगी कि कितना कीमती गिलास फोड़ दिया, रोज इतना माल खाती हो उसकी शक्ति कहॉ गई। अपने मायके मे गिलास फूटा होता तो मालूम चलता।
कोई भी काम ठीक से नही होता, ना जाने कहॉ ध्यान रहता। भाभी भी कड़क कर बोल दी कि हॉ, मै तो बैठी बैठी खाती हूँ, आप तो खड़ी खड़ी खाती है।
जब से आई हूँ तब से रोज दो चार जली कटी ना सुना दो तब तक आपको चैन नही पड़ेगा। कभी मेरी मॉ को तो कभी मेरे बाप को हमेशा मेरे मायके वाले को कोसती रहती हो.. दोनो तरफ से तीर बरस कर एक दूसरे को छलनी कर रहे थे।
घर के अलावा उसने और भी जगह सास बहू के झगड़े सुनते सुनते डर गई व शादी से कतराने लगी।
पर मॉ बाप के कारण शादी करनी पड़ी और एक अंजाने भय को लेकर ससुराल आ गई। पर आज की घटना से उसकी सोच ही बदल गई कि सब सास या बहू में ऐसा नही होता है।
नींद ना आने की वजह से उसने सोचा चलो थोड़ी देर मॉ से बात कर लूँ। मॉ ने इतनी रात को उसको फ़ोन करते देखकर बोला कि शीलू सब कुछ ठीक तो है ना ?
कही जवाई राजा या सास ननद से तो झगड़ा नही हो गया। वह बोली नही, मॉ ऐसा कुछ नही। मालूम है मॉ आज मेरे हाथो से कप नीचे गिरकर टूट गया तभी सास आ गई और आगे बोलती उसके पहले ही मॉ ने बोलना शुरू कर दिया बेटा, फिर तेरी सास के चिल्लाने पर तूने अच्छा सा जवाब दे दिया ना, हॉ बेटा कभी भी दबकर नही रहना, तु भी पढीलिखी अच्छी लड़की है, तेरे मे कोई कमी थोड़े ही है जो सुनेगी।
तभी बात को काटते हुये तेज़ आवाज मे शीलू बोली कि मॉ अब बस करो, मैं अपनी दूसरी मॉ के ख़िलाफ़ कुछ नही सुन सकती। मॉ सहम गई और बोली तु ये क्या बोल रही है?
हॉ मॉ आज मेरे हाथो से जब कप गिरा तो सासू मॉ ने.. सारी बात बता कर अंत मे बोली, अब तो आप समझ गई ना सारी बात। और हॉ, सास ने सिर्फ बोलने के लिये नही बोला, वह वाकई मे ज्योति की तरह मेरे से व्यवहार कर रही है।
मॉ एक बात कहूँगी आप बुरा तो नही मानेगी । हॉ बोल बेटा।
मॉ काश आप भी मेरी नई मॉ की तरह भाभी के साथ व्यवहार करती तो शायद भइया भाभी अलग घर मे नही होते।
मॉ मेरी सास ने शुरू से ही अपने प्रेम से नींव मजबूत कर ली तो उस पर टिका परिवार मे मज़बूती कैसे नही आयेगी।
आज मॉ को महसूस हो रहा था कि वो नही बल्कि शीलू उसकी मॉ बनकर उसे अच्छी सीख दे रही है।
मॉ को गलती का एहसास हो गया, शीलू आगे कुछ बोलती उससे पहले ही मॉ ने कहा शीलू अब जब तु यहाँ आयेगी तो यहॉ पर भी पूरे परिवार की नींव मे मज़बूती पायेगी।
अब फ़ोन रख, मुझे बेटाबहू के स्वागत की तैयारी करनी है।
शादी के बाद नई जिन्दगी की शुरूआत मे अगर आज सास समझदारी से काम नही लेती, अपनत्व नही जताती तो शायद शुरूआत की नींव ही कमज़ोर होने से पूरी जिन्दगी आपस मे दरार पड़ जाती।
कप को फूटने से कोई नही रोक सकता, किन्तु प्रेम को टूटने से तो हम रोक सकते है। कॉच के टुकड़े हो जाए पर घर के टुकड़े ना होने दे।
घर मे प्रेम का वातावरण बनाये रखे, एक दूसरे के सम्मान को समझे, इज़्ज़त करे तो घर स्वर्ग बन जायेगा।
घर नर्क से स्वर्ग मे बदल सकता है यदि बहू सास को मॉ मान ले व सास बहू को बेटी मान ले। दृष्टि बदलने से सृष्टि बदल जायेगी।.
आप सभी को सोच बदलनी होगी तभी समाज बदलेगा
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