संजीव जैन's Album: Wall Photos

Photo 11,068 of 15,595 in Wall Photos

सुंदर हाथ
बहुत समय पहले की बात है। कुछ स्त्रियां एक नदी के तट पर बैठी थीं। वे सभी धनवान होने के साथ-साथ अत्यंत सुंदर भी थीं। वे नदी के शीतल एवं स्वच्छ जल में अपने हाथ - पैर धो रही थीं तथा पानी में अपनी परछाई देख- देखकर अपने सौंदर्य पर स्वयं ही मुग्ध हो रही थीं।
तभी उनमें से एक ने अपने हाथों की प्रशंसा करते हुए कहा, “देखो, मेरे हाथ कितने सुंदर हैं।” लेकिन दूसरी स्त्री ने दावा किया कि उसके हाथ ज्यादा खूबसूरत हैं। तीसरी स्त्री ने भी यही दावा दोहराया। उनमें इस पर बहस छिड़ गई। तभी एक वृद्धा लाठी टेकती हुई वहां से निकली। उसके कपड़े मैले- कुचैले थे। वह देखने से ही अत्यंत निर्धन लग रही थी। उन स्त्रियों ने उसे देखते ही कहा, “व्यर्थ की तकरार छोड़ो, इस बुढ़िया से पूछते हैं कि हममें से किसके हाथ सबसे अधिक सुंदर हैं।” उन्होंने बुढ़िया को पुकारा, “ए बुढ़िया, जरा इधर आकर ये तो बता कि हममें से किसके हाथ सबसे अधिक सुंदर हैं।” वृद्धा किसी तरह लाठी टेकती हुई उनके पास पहुंची और बोली, “मैं बहुत भूखी-प्यासी हूं। पहले मुझे कुछ खाने को दो। चैन पड़ने पर ही कुछ बता पाऊंगी।” वे सब हंस पड़ी और एक स्वर में बोलीं, “जा भाग, हमारे पास कोई खाना- वाना नहीं है। ये भला हमारी सुंदरता को क्या पहचानेगी।”
वहीँ थोड़ी ही दूरी पर एक मजदूर स्त्री बैठी थी। वह देखने में सामान्य लेकिन मेहनती और विनम्र थी। उसने वृद्धा को अपने पास बुलाकर प्रेम से बैठाया और अपनी पोटली खोलकर अपने खाने में से आधा खाना उसे दे दिया। फिर नदी से लाकर ठंडा पानी पिलाया। फिर उस मजदूर स्त्री ने उसके हाथ-पैर धोए और अपनी फटी धोती से पौंछकर साफ कर दिए। इससे वृद्धा को बड़ा आराम मिला। जाते समय वह वृद्धा उन सुंदर स्त्रियों के पास जाकर बोली, “सुंदर हाथ उन्हीं के होते हैं जो अच्छे कर्म करें तथा जरूरतमंदों की सेवा करें। अच्छे कार्यों से हाथों का सौंदर्य बढ़ता है, आभूषणों से नहीं।”
Moral - सुंदर हाथ उन्हीं के होते हैं जो अच्छे कर्म करें तथा जरूरतमंदों की सेवा करें। अच्छे कार्यों से हाथों का सौंदर्य बढ़ता है, आभूषणों से नहीं।” जिस हाथ से आहारदान , वैय्यावृत्त ना हो उस हाथ का क्या काम।

" हस्तयुगल जिनवर कहें पर का करता होय।
ऐसी मिथ्या बुद्धि से भ्रमन चतुर्गति होय।।"
Nishi Dev