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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी को दी 'अर्थपूर्ण' विदाई !

हो सकता है कुछ छटपटाहट रही होगी आपके अंदर भी लेकिन आज के बाद शायद आपको वैसा संकट नहीं रहेगा...मुक्ति का आनंद भी रहेगा...और अपने मूलभूत जो सोच रही होगी उसके अनुसार कार्य करने, सोचने का और बात बताने का अवसर भी मिलेगा।

देश के मुस्लिमों में सुरक्षा की भावना वाले बयान से सरकार को जाते-जाते 'नसीहत' देने वाले उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी को गुरुवार को पीएम नरेंद्र मोदी ने संसद में 'अर्थपूर्ण' शब्दों के साथ विदाई दी। मोदी ने लगातार 2 कार्यकाल पूरा करने वाले अंसारी के योगदान की चर्चा की, लेकिन साथ ही कुछ चुटकियां भी लीं। राज्यसभा में अंसारी को विदाई देते हुए मोदी ने कहा कि हो सकता है कि कार्यकाल के दौरान उनके अंदर कुछ छटपटाहट रही हो, लेकिन यह संकट आज के बाद नहीं रहेगा। मोदी जब यह बोल रहे थे, तब राज्यसभा के पदेन सभापति होने के नाते हामिद अंसारी सदन का संचालन कर रहे थे।

हामिद अंसारी राजनयिक भी रह चुके हैं और पीएम ने उनकी विदाई पर दिए अपने भाषण में इस बात पर चुटकी ली। पीएम मोदी ने कहा, 'आपका अपना जीवन भी डिप्लोमैट का रहा। एक करियर डिप्लोमैट का क्या काम होता है यह पीएम बनने के बाद मुझे समझ में आया...क्योंकि उनके हंसने का क्या अर्थ होता है...हाथ मिलाने के तरीके का क्या अर्थ होता है.. यह तुरंत समझ नहीं आता क्योंकि उनकी ट्रेनिंग वही होती है...लेकिन इस कौशल का इस्तेमाल 10 सालों में जरूर हुआ होगा ...सबको संभालने में उस कौशल ने किस प्रकार से इस सदन को लाभ पहुंचाया होगा।'

प्रधानमंत्री के छोटे से भाषण के दौरान उनकी चुटकियों पर कई बार हामिद अंसारी भी मुस्कुराते दिखे। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, 'आपके कार्यकाल का बहुत सारा हिस्सा वेस्ट एशिया से जुड़ा रहा है बतौर डिप्लोमैट। उसी दायरे में जिंदगी के बहुत सारे आपके वर्ष गए। उसी माहौल में, उसी सोच में, उसी डिबेट में ऐसे लोगों के बीच रहे। वहां से रिटायर होने के बाद भी ज्यादातर काम वही रहा चाहे माइनॉरिटी कमिशन हो या अलीगढ़ यूनिवर्सिटी हो।'

प्रधानमंत्री ने आगे कहा, 'लेकिन ये 10 साल पूरी तरह एक अलग तरह का जिम्मा आपके पास आया...पूरी तरह एक-एक पल संविधान-संविधान-संविधान के दायरे में चलाना...और आपने उसे बाखूबी निभाने का भरपूर प्रयास किया...हो सकता है कुछ छटपटाहट रही होगी आपके अंदर भी लेकिन आज के बाद शायद आपको वैसा संकट नहीं रहेगा...मुक्ति का आनंद भी रहेगा...और अपने मूलभूत जो सोच रही होगी उसके अनुसार कार्य करने, सोचने का और बात बताने का अवसर भी मिलेगा।'