संजीव जैन's Album: Wall Photos

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औरतों के जिस्म पर सब मर्द बने हैं
मर्दों की जहाँ बात हो, नामर्द खड़े हैं

शेरों से खेलने को पैदा हुए थे जो
नाज़ुक़ किसी के बदन से वो खेल रहे हैं

हर वक़्त भूखी आँखें कुछ खोज रही हैं
भूखे बेजान जिस्म को भी नोंच रहे हैं

गुल ही पे नहीं आफ़त गुलशन पे है क़यामत
झड़ते हुए फूलों पे, वे कलियों पे पड़े हैं

मरने की नहीं हिम्मत ना जीने का सलीक़ा
हम सूरत – ए - इंसान बेशर्म बड़े हैं

शुभ दोपहरी बेटी बचाओ परिवार