ऐसा हुआ की

  • मेरी दवाई की दुकान है, मैं अक्सर सुबह 8 बजे दुकान पहुंच जाता, पड़ोस में ब्यूटी पार्लर है और ये लोग शाम अपने पार्लर की चाभी छोड़ जाते की सुबह मुझसे चाभी ले पार्लर खोल लें ।
    सर्दियों के दिन थे, दिल्ली की ठंड तो तौबा तौबा, 9 के आस पास एक छोटी सी लड़की पार्लर में काम करने वाली चाभी मांगने आई। पिछली शाम वो लोग चाभी देना भूल गए थे, सो निराश हो उसने पूछा अंकल अन्दर बैठ सकती हूं?
    मेंने उसे कहा आ जाओ
    मुझे उस दुबली पतली सी लड़की को देख थोड़ा अजीब सा लग रहा था,
    ऐसे ही मेंने पूछा उससे की पढ़ाई ना कर पार्लर में काम क्यों करती हो?
    मेरा प्रश्न उसे गहरे से लगा, उसकी आंखें भर गई होंट कांपे, शायद पूरी हिम्मत से उसने आंसू छलकने नहीं दिए। मुझे बुरा लगा कि मैने उसका दिल दुखाया,
    तब तक मैं चाय बना चुका था,एक कप चाय का उसे दिया।
    अंकल घर में सबसे बड़ी हूं , ६ महीने से पापा को पैरालिसिस हुआ है,
    उनके देखभाल ममी करती हैं,दो बहने हैं छोटी
    कितना पैसा देती है।पार्लर वाली दीदी तुम्हें?
    १२००
    १२०० में घर कैसे चलता है?
    अंकल मामा थोड़ी हेलप कर देते हैं
    वो भी पता नहीं कब तक करेंगे
    तुमने पढ़ाई कहां तक की?
    जी १२वीं तक
    तब तक पार्लर वाली दीदी आ चुकी थी,और वो चली गई।
    ये बात लगभग १५ साल पहले की है।
    उन दिनों pharmaceutical distributors computrised ho rahe थे।
    दिन भर कोई ना कोई अक्सर पूछ लेता की कोई कंप्यूटर ऑपरेटर हो तो बताना
    मेरे मन ने मुझसे कहा कि अगर ये लड़की कंप्यूटर कोर्स कर ले तो अच्छा काम सकती है।
    एक दिन मैने उसे बुला कर ये सुझाव दिया ,उसने खामोशी से पूछा कि कंप्यूटर कोर्स के लिए काम छोड़ना पड़ेगा और कोर्स की फीस
    1200 rupees महीने देने का आश्वासन दिया और फीस का भी अस्वीकार ना करे साथ में जोड़ दिया कि जब जॉब लग जाए तो फीस वाले पैसे लौटा दे
    २ महीने में कोर्स पूरा हुआ डिस्ट्रीब्यूटर के यहां जॉब मिली ४००० की ।
    महीने भर के बाद वो बच्ची पैसे ले कर आई तो मेंने उसे कहा कि इन पैसों से को किसी और को ये कोर्स करवा दे
    एक साल में इन बच्चियों ने अपना ग्रुप बना लिया और शायद १०० से अधिक लड़कियों को इस लायक बना दिया कि कुछ अच्छा काम सकें