Ballu Yadav
सांसद संध्या राय ने जनहित में दिये 1 करोड़ व एक माह की तनख्वाह
--------------------------------------------
भिण्ड- दतिया की लोकप्रिय संसद श्रीमती संध्या राय ने प्रधानमंत्री राहत कोष में अपने एक माह का वेतन 1 लाख रुपया का सम्पूर्ण दान कर covid-19 की देश की जंग में समर्पित किये। इसके साथ ही उन्होंने पार्लियामेंट की mplads फंड्स में कमिटी को भी 1 करोड़ की राहत राशि उनके संसदीय क्षेत्र के दोनों जिलों भिण्ड व दतिया में कोरोना की रोकथाम में उपयोग करने बावत भी अलग से स्वीकृत कर दी
मनोज जैन
दुनियां का सबसे छोटा संविधान अमेरिका का है
केवल 13 पन्नों का
उससे भी छोटा संविधान योगी जी का है केवल दो लाइन का
कायदे में रहोगे तो ही फायदे में रहोगे
sanjay jain
किसी का अपमान करके जो सुख मिलता है
वह थोड़े समय का होता है …लेकिन किसी को
सम्मान देकर जो आनंद मिलता है
वह जीवन भर साथ रहता है !
Anupama Jain
जब तुम्हें छूने की इच्छा
मेरी उँगलियों से निकलकर
मेरी रूह तक पहुँचती है,
तब समझ आता है—
हर स्पर्श देह को नहीं छूता,
कुछ स्पर्श तो
सीधे भीतर के मंदिर में उतरते हैं।
तुम सामने होती हो
और मेरे हाथ
तुम्हारी ओर बढ़ने से पहले
कुछ पल ठहर जाते हैं—
जैसे कोई फ़क़ीर
दुआ माँगने से पहले
आँखें बंद कर ले।
फिर जब मेरी उँगलियाँ
तुम्हारी हथेली को छूती हैं,
तो लगता है
जैसे बरसों से भटकी हुई नदी
आख़िर अपना समुद्र पा गई हो।
तुम्हारी त्वचा पर
मेरी उँगलियों की धीमी आहट
वैसी ही है
जैसे रात की ख़ामोशी में
चाँदनी उतरती है
और किसी सूने आँगन को
बिना आवाज़ के भर देती है।
मैं तुम्हें छूता नहीं—
तुम्हारे भीतर छिपे
उस अनकहे हिस्से को
पढ़ता हूँ,
जिसे शायद
तुमने भी कभी
किसी के सामने पूरा नहीं खोला।
तुम्हारी साँस
जब मेरे क़रीब आकर
थोड़ी ठहरती है,
तो लगता है
जैसे हवा भी जानती हो
कि इस पल को
ज़्यादा तेज़ नहीं गुज़रना चाहिए।
और जब तुम
अपना सिर मेरे सीने पर रख देती हो,
तो मेरी बाँहों का घेरा
अचानक आलिंगन नहीं रहता—
वह एक ऐसी पनाह बन जाता है
जहाँ तुम्हारी सारी थकान
धीरे-धीरे अपने कपड़े उतारकर
ख़ामोशी में सो जाती है।
उस क्षण
मैं तुम्हें पाने की नहीं,
तुम्हें सँभालने की इच्छा करता हूँ—
जैसे कोई
हथेली में रखे हुए दीपक को
हवा से बचाता है।
क्योंकि प्रेम में
सबसे मादक स्पर्श वह नहीं
जो देह को बेचैन कर दे,
सबसे मादक वह है
जिसके बाद स्त्री
अपनी आँखें बंद करके
ख़ुद को सुरक्षित महसूस करे।
तुम्हारे माथे पर
एक धीमा-सा चुंबन रखकर
मैंने जाना—
इबादत में भी शायद
यही होता होगा,
जहाँ होंठ कुछ नहीं कहते
और आत्मा
पूरी तरह झुक जाती है।
फिर तुमने आँखें उठाईं,
और उन आँखों में
जो अधूरी-सी प्यास थी,
उसने मुझे सिखाया—
चाहत को हमेशा
पूरा करना ज़रूरी नहीं होता।
कुछ चाहतें
अधूरी रहकर ही
उम्र भर महकती हैं,
ठीक उस इत्र की तरह
जो कपड़ों से उतर जाने के बाद भी
स्मृति में बसा रहता है।
उस रात
हमारे बीच
शायद बहुत कम हुआ—
कुछ उँगलियाँ मिलीं,
कुछ साँसें ठहरीं,
एक लंबा आलिंगन हुआ,
और बहुत-सा मौन।
लेकिन उसी मौन में
मैंने तुम्हें
पहली बार पूरा छुआ था।
देह से नहीं—
उस जगह तक
जहाँ प्रेम
नाम खो देता है,
स्पर्श
प्रार्थना बन जाता है,
और दो इंसान
कुछ देर के लिए
एक-दूसरे की
इबादत हो जाते हैं।
vinay shukla shukla
गों के लिए उदाहरण स्थापित करना दूसरों को प्रभावित करने का एक मात्र साधन है। –अल्बर्ट आइंस्टीन
Suvarna Jain
आज रात नींद नहीं आ रही बस रो रहा हूं इससे ज्यादा मेरी औकात भी नहीं है कुछ करने की हे मेरे महादेव काश तुम ने मुझे ऐसा कुछ दिया होता तो मैं पूरे इस्लामिक आतंकवाद का नामोनिशान मिटा देता कल इस कविता के साथ ज़ी न्यूज़ के सामने चिल्लाऊंगा सनद रहे ईश्वर ने इससे ज्यादा कुछ नहीं दिया । हर हर महादेव
*****************
*****************
प्रेम दिवस पर आज पड़ोसी फिर से प्रेम दिखाया है ।
सांप की फितरत जहर उगलना पुनः जहर उगलाया है ।
30 शेर जब गिरे धरा पर मां धरती का नूर गया ।
मेहंदी चूड़ी बिंदी महावर माथे का सिंदूर गया ।
पापा खेल खिलौने देंगे इसी प्यार में बैठे हैं ।
होली संग खेलेंगे बच्चे इंतजार में बैठे हैं ।
बच्चे नहीं जानते भारत मां की पीड़ा झेल गए ।
पापा एक माह पहले ही खून की होली खेल गए ।
जिनका रक्त बना पानी वह घर में ही बेहोश रहे ।
राजनीति के चरण चाटने वाले सब खामोश रहे ।
मुंह में गाली भरी हुई है निर्णय ना ले पाऊंगा ।
संस्कारों में बंधा हुआ हूं गाली ना दे पाऊंगा ।
ये मंजर ये मौसम सब बर्बादी जैसा लगता है ।
खुद का चेहरा भी मुझको अपराधी जैसा लगता है ।
सैनिक जितने मरे यहां पर जरा खोट मेरा भी है ।
तुम जिस दिल्ली में बैठे हो वहां एक वोट मेरा भी है ।
आतंक निकलता उसी कोख का फटना बहुत जरूरी है ।
इस्लामिक आतंकवाद का मिटना बहुत जरूरी है ।
शेर बना कर भेजे थे सियार पड़े हैं दिल्ली में ।
तीनों बंदर गांधी के बीमार पड़े हैं दिल्ली में ।
जो कुछ सेना को करना है कर जाने दो मोदी जी ।
फिर शेरों को सीमा के अंदर जाने दो मोदी जी ।
तुम दुश्मन से युद्ध करो हम अंदर सब कुछ सह लेंगे ।
एक समय खा लेंगे खाना या फिर भूखा रह लेंगे ।
जितनी ताकत शेरों में है सीमा पर दिखला दो तुम ।
सब कुछ महंगा कर दो लेकिन रक्षा बजट बढ़ा दो तुम ।
ओ सैनिक तुझसे कहता हूं कि अब बंदूक उठा ले तू ।
या सीमा से घर आ जा अपना संदूक उठा ले तू ।
सी आर पी एफ के शेर सुने सभी बलों के जवान सुने ।
खाकी वाले जरा सुने और फौजी देश की शान सुने ।
दुश्मन की सारी हरकत का अपनी संग में तोड़ रखो ।
47 और ak-56 24 घंटे लोड रखो ।
ना सहो किसी भी गोली को बस इतना ही कर डालो तुम ।
पूरी मैगजीन दुश्मन की छाती में भर डालो तुम ।
तुम कोई कायरता वाला संदेश नहीं मानो सैनिक ।
पीछे हटने का आए आदेश नहीं मानो सैनिक ।
बंदूक उठा आतंकवाद की छाती पर चढ़ जाना तुम ।
एलओसी की लाइन लांघकर भी आगे बढ़ जाना तुम।
जवाब सभी गद्दारों को उनके ही रंग में दे आना ।
जो नेता बकवास करें उसको भी संग में ले जाना ।
कितनी ताकत भारत में है जग को यहां दिखा दो तुम ।
जो भी होगा देखेंगे बस पाकिस्तान मिटा दो तुम ।
--एक देशभक्त