Inbooker
आपको सूचित किया जाता है कि आवश्यक सिस्टम रखरखाव के कारण Inbook सेवा अस्थायी रूप से कुछ घंटों के लिए अनुपलब्ध रहेगी।
इस असुविधा के लिए हमें खेद है और हम आपके धैर्य की सराहना करते हैं। सेवा को जल्द से जल्द बहाल कर दिया जाएगा।
आपकी समझ के लिए धन्यवाद।
संजीव जैन
सभी इनबुकर साथियों से आग्रह है कि पोल पर अपना मत अवश्य दें।
मनोज जैन
दुनियां का सबसे छोटा संविधान अमेरिका का है
केवल 13 पन्नों का
उससे भी छोटा संविधान योगी जी का है केवल दो लाइन का
कायदे में रहोगे तो ही फायदे में रहोगे
sanjay jain
किसी का अपमान करके जो सुख मिलता है
वह थोड़े समय का होता है …लेकिन किसी को
सम्मान देकर जो आनंद मिलता है
वह जीवन भर साथ रहता है !
Dimple Durrani
Dear inbooker,
there is a boy,an inbooker who unnecessarily is Sharing my prsnl pics on Inbook which I don't allow to anyone... Inspite of deleting my pic as I told him he's ruthlessly arguing.... N as far as I had read the rules of Inbook it's not permissible... I rqst inbooker to deactivate such person's profile or else I'll have to take some legal action against it... N those inbooker who agree wid me plz repost it... So that hemant (as his name is on his profile) couldn't do such thing with any other girl
..
Manoj Sharma
फर्क नहीं पडता दुश्मन कि संख्या कितनी है,
जीत तो अपने हौसलों से होती है !
Ashutosh Arya
15 अगस्त का दिन कहता,
"आजादी अभी अधूरी है।"
#अखण्ड_भारत
#आत्मनिर्भर_भारत
Anupama Jain
जब तुम्हें छूने की इच्छा
मेरी उँगलियों से निकलकर
मेरी रूह तक पहुँचती है,
तब समझ आता है—
हर स्पर्श देह को नहीं छूता,
कुछ स्पर्श तो
सीधे भीतर के मंदिर में उतरते हैं।
तुम सामने होती हो
और मेरे हाथ
तुम्हारी ओर बढ़ने से पहले
कुछ पल ठहर जाते हैं—
जैसे कोई फ़क़ीर
दुआ माँगने से पहले
आँखें बंद कर ले।
फिर जब मेरी उँगलियाँ
तुम्हारी हथेली को छूती हैं,
तो लगता है
जैसे बरसों से भटकी हुई नदी
आख़िर अपना समुद्र पा गई हो।
तुम्हारी त्वचा पर
मेरी उँगलियों की धीमी आहट
वैसी ही है
जैसे रात की ख़ामोशी में
चाँदनी उतरती है
और किसी सूने आँगन को
बिना आवाज़ के भर देती है।
मैं तुम्हें छूता नहीं—
तुम्हारे भीतर छिपे
उस अनकहे हिस्से को
पढ़ता हूँ,
जिसे शायद
तुमने भी कभी
किसी के सामने पूरा नहीं खोला।
तुम्हारी साँस
जब मेरे क़रीब आकर
थोड़ी ठहरती है,
तो लगता है
जैसे हवा भी जानती हो
कि इस पल को
ज़्यादा तेज़ नहीं गुज़रना चाहिए।
और जब तुम
अपना सिर मेरे सीने पर रख देती हो,
तो मेरी बाँहों का घेरा
अचानक आलिंगन नहीं रहता—
वह एक ऐसी पनाह बन जाता है
जहाँ तुम्हारी सारी थकान
धीरे-धीरे अपने कपड़े उतारकर
ख़ामोशी में सो जाती है।
उस क्षण
मैं तुम्हें पाने की नहीं,
तुम्हें सँभालने की इच्छा करता हूँ—
जैसे कोई
हथेली में रखे हुए दीपक को
हवा से बचाता है।
क्योंकि प्रेम में
सबसे मादक स्पर्श वह नहीं
जो देह को बेचैन कर दे,
सबसे मादक वह है
जिसके बाद स्त्री
अपनी आँखें बंद करके
ख़ुद को सुरक्षित महसूस करे।
तुम्हारे माथे पर
एक धीमा-सा चुंबन रखकर
मैंने जाना—
इबादत में भी शायद
यही होता होगा,
जहाँ होंठ कुछ नहीं कहते
और आत्मा
पूरी तरह झुक जाती है।
फिर तुमने आँखें उठाईं,
और उन आँखों में
जो अधूरी-सी प्यास थी,
उसने मुझे सिखाया—
चाहत को हमेशा
पूरा करना ज़रूरी नहीं होता।
कुछ चाहतें
अधूरी रहकर ही
उम्र भर महकती हैं,
ठीक उस इत्र की तरह
जो कपड़ों से उतर जाने के बाद भी
स्मृति में बसा रहता है।
उस रात
हमारे बीच
शायद बहुत कम हुआ—
कुछ उँगलियाँ मिलीं,
कुछ साँसें ठहरीं,
एक लंबा आलिंगन हुआ,
और बहुत-सा मौन।
लेकिन उसी मौन में
मैंने तुम्हें
पहली बार पूरा छुआ था।
देह से नहीं—
उस जगह तक
जहाँ प्रेम
नाम खो देता है,
स्पर्श
प्रार्थना बन जाता है,
और दो इंसान
कुछ देर के लिए
एक-दूसरे की
इबादत हो जाते हैं।