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Anupama Jain
तुम से बिछड़ के फिर कोई हसरत नहीं बची
फिर तेरे जैसे शाक्स से मिलना न हुआ
ARVIND Ashiwal
सूरज ने गालों पर रखी लाली,
पंछियों ने छेड़ी सुबह वाली ताली।
*गुरुवार, आया नई रौनक लेकर*
दिल
प्रमोद कुमावत Pramod kumawat
महाकवि सुब्रमण्यम भारती ऐसे साहित्यकार थे जो सक्रिय रूप से स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल रहे, जबकि उनकी रचनाओं से प्रेरित होकर दक्षिण भारत में बड़ी तादाद में आम लोग आजादी की लड़ाई में कूद पड़े।