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Anupama Jain
उसने मेरी हथेली पे अपनी नाज़ुक सी
ऊँगली से लिखा मुझे प्यार है तुमसे...
न जाने कैसी स्याही थी की वो..
लफ्ज़ मिटे भी नहीं और आज तक दिखे भी नहीं...
प्रमोद कुमावत Pramod kumawat
महाकवि सुब्रमण्यम भारती ऐसे साहित्यकार थे जो सक्रिय रूप से स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल रहे, जबकि उनकी रचनाओं से प्रेरित होकर दक्षिण भारत में बड़ी तादाद में आम लोग आजादी की लड़ाई में कूद पड़े।