Inbooker
आपको सूचित किया जाता है कि आवश्यक सिस्टम रखरखाव के कारण Inbook सेवा अस्थायी रूप से कुछ घंटों के लिए अनुपलब्ध रहेगी।
इस असुविधा के लिए हमें खेद है और हम आपके धैर्य की सराहना करते हैं। सेवा को जल्द से जल्द बहाल कर दिया जाएगा।
आपकी समझ के लिए धन्यवाद।
Bunny Yadav
brothers ND sisters all of u sabhi post ko like Marthy raho sabhike postoko tho interest ayenga use karneme
Anindya Mazumdar
Covrelief provides live tracking of vacant hospital beds in your city, oxygen availability, plasma, videos by renowned doctors, etc.
Kindly share with your friends and families.
https://covidrelief.glideapp.io/
Pankaj Jain
100% साक्षर हैं केरल में..???
कुछ वर्ष पहले डिस्कवरी चैनल पर मैँ एक कार्यक्रम देख रहा था जो कि आहार खानपान आदि पर आधारित था ..........
हालाँकि इस तरह के कार्यक्रम में अपनी कोई विशेष रुचि तो नही फिर भी अनमने मन से देख ही रहा था।
तो उस कर्यक्रम में दिखाया गया कि केरल की एक महिला के घर कोई विशेष अतिथि आने वाले थे तो महिला ने विशेष अतिथि के लिए विशेष भोजन बनाने का विचार किया और चल पड़ी स्थानीय बाजार कुछ विषय खरीदारी करने ...........
वो गई एक माँस के बाजार में और दुकानदार से पूछा -: कुटिपाई है ?
दुकानदार-: नही है ।
अब अपनी भी थोड़ी उत्सुकता जगी कि ये कुटिपाई क्या होता भई ?
उस महिला ने 10-12 दुकानों पर पूछा तब एक दुकानदार ने हामी भरी कि हाँ मेरे पास कुटिपाई है ........
और उसने महिला को कुटिपाई उपलब्ध कराया और चैनल वालों ने कुटिपाई का वर्णन किया तब मैँ एकदम से सन्न रह गया ..........
क्या होता है कुटिपाई ???????????
एक गर्भवती बकरी जिसका प्रसव का समय बिल्कुल समीप हो मतलब एक या दो दिन में ही प्रसव होने वाला हो मतलब गर्भस्थ शिशु पूर्ण हो चुका होता है तब उस बकरी की हत्या करके उस गर्भस्थ शिशु को निकाला जाता है और वो होता है "कुटिपाई" .........
फिर वो महिला बताने लगी कि कुटिपाई बहुत स्वादिष्ट होता है नरम होता है
जल्दी पकता है
चबाने में आसानी होती है
पचाने में आसानी होती है
ईट्स सो डिलिशियस ..............
और मैँ बैठा बैठा सोच रहा कि इंसान और हैवान में क्या फर्क रह गया ?
मित्रों कुछ समय पहले शायद डिस्कवरी का ही एक वीडियो सामने आया था कि एक शेरनी ने एक मादा बन्दर का शिकार किया और जब उसका पेट फाड़ा तो उसमें से एक सम्पूर्ण शिशु बाहर आया तो शेरनी की ममता जाग उठी और शिशु को दुलारने लगी ..... और शायद उस शिशु का उसने पालने पोषण भी किया ।
अभी हाल में ही एक वीडियो आया जिसमे एक मगरमच्छ एक मादा हिरन को पकड़ लेता है कुछ देर दबोचने के पश्चात मगरमच्छ को अहसास होता है कि मादा हिरन गर्भवती है तो वो अपने जबड़े खोल उस मादा हिरन को आजाद कर देता है ...............
ये सब क्या है भई ????????
मनुष्य मनुष्यता भूल रहा सिर्फ जीभ के स्वाद के लिए उसे गर्भस्थ शिशु चाहिए ........
मनोरंजन के लिए एक हथिनी की क्रूर हत्या .............
और हाँ एक बात और याद आई ...... चीन का बेबी सूप ...... घिन्न आने लगी स्वयं को मनुष्य कहने में ।
और दूसरी तरफ जानवर क्या दिखा रहे वो देखिए ........
मतलब एक तरह से जानवर और मनुष्य एकदूसरे से अपना व्यवहार की अदला बदली कर रहे .......क्या पृथ्वी का अंत निकट है ?
ये कोरोना ये आँधी तूफान बवंडर भूकम्प साइक्लोन आदि ..........
रहने लायक नही रही ये पृथ्वी आओ करें आह्वाहन कि
खोल दो तीसरी आँख हे नटराज......... हो जाने दो ताण्डव फिर से .....
अब तो सच मे फट ही पड़े ये पृथ्वी और समा ले स्वयं में इस तमाम प्रकृति को ........ ....
फिर से सृजन करें ब्रह्मा .......
नई धरती नया आसमान हो ।
जहाँ इंसान का मतलब इंसान हो ।।
Anupama Jain
जब तुम्हें छूने की इच्छा
मेरी उँगलियों से निकलकर
मेरी रूह तक पहुँचती है,
तब समझ आता है—
हर स्पर्श देह को नहीं छूता,
कुछ स्पर्श तो
सीधे भीतर के मंदिर में उतरते हैं।
तुम सामने होती हो
और मेरे हाथ
तुम्हारी ओर बढ़ने से पहले
कुछ पल ठहर जाते हैं—
जैसे कोई फ़क़ीर
दुआ माँगने से पहले
आँखें बंद कर ले।
फिर जब मेरी उँगलियाँ
तुम्हारी हथेली को छूती हैं,
तो लगता है
जैसे बरसों से भटकी हुई नदी
आख़िर अपना समुद्र पा गई हो।
तुम्हारी त्वचा पर
मेरी उँगलियों की धीमी आहट
वैसी ही है
जैसे रात की ख़ामोशी में
चाँदनी उतरती है
और किसी सूने आँगन को
बिना आवाज़ के भर देती है।
मैं तुम्हें छूता नहीं—
तुम्हारे भीतर छिपे
उस अनकहे हिस्से को
पढ़ता हूँ,
जिसे शायद
तुमने भी कभी
किसी के सामने पूरा नहीं खोला।
तुम्हारी साँस
जब मेरे क़रीब आकर
थोड़ी ठहरती है,
तो लगता है
जैसे हवा भी जानती हो
कि इस पल को
ज़्यादा तेज़ नहीं गुज़रना चाहिए।
और जब तुम
अपना सिर मेरे सीने पर रख देती हो,
तो मेरी बाँहों का घेरा
अचानक आलिंगन नहीं रहता—
वह एक ऐसी पनाह बन जाता है
जहाँ तुम्हारी सारी थकान
धीरे-धीरे अपने कपड़े उतारकर
ख़ामोशी में सो जाती है।
उस क्षण
मैं तुम्हें पाने की नहीं,
तुम्हें सँभालने की इच्छा करता हूँ—
जैसे कोई
हथेली में रखे हुए दीपक को
हवा से बचाता है।
क्योंकि प्रेम में
सबसे मादक स्पर्श वह नहीं
जो देह को बेचैन कर दे,
सबसे मादक वह है
जिसके बाद स्त्री
अपनी आँखें बंद करके
ख़ुद को सुरक्षित महसूस करे।
तुम्हारे माथे पर
एक धीमा-सा चुंबन रखकर
मैंने जाना—
इबादत में भी शायद
यही होता होगा,
जहाँ होंठ कुछ नहीं कहते
और आत्मा
पूरी तरह झुक जाती है।
फिर तुमने आँखें उठाईं,
और उन आँखों में
जो अधूरी-सी प्यास थी,
उसने मुझे सिखाया—
चाहत को हमेशा
पूरा करना ज़रूरी नहीं होता।
कुछ चाहतें
अधूरी रहकर ही
उम्र भर महकती हैं,
ठीक उस इत्र की तरह
जो कपड़ों से उतर जाने के बाद भी
स्मृति में बसा रहता है।
उस रात
हमारे बीच
शायद बहुत कम हुआ—
कुछ उँगलियाँ मिलीं,
कुछ साँसें ठहरीं,
एक लंबा आलिंगन हुआ,
और बहुत-सा मौन।
लेकिन उसी मौन में
मैंने तुम्हें
पहली बार पूरा छुआ था।
देह से नहीं—
उस जगह तक
जहाँ प्रेम
नाम खो देता है,
स्पर्श
प्रार्थना बन जाता है,
और दो इंसान
कुछ देर के लिए
एक-दूसरे की
इबादत हो जाते हैं।