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Nalini Mishra
*भगवान राम के आदर्श आपके जीवन को सुशोभित करे व आपका जीवन राममय बने*।
*रामनवमी की हार्दिक शुभकामनाएँ*।
Anupama Jain
जब तुम्हें छूने की इच्छा
मेरी उँगलियों से निकलकर
मेरी रूह तक पहुँचती है,
तब समझ आता है—
हर स्पर्श देह को नहीं छूता,
कुछ स्पर्श तो
सीधे भीतर के मंदिर में उतरते हैं।
तुम सामने होती हो
और मेरे हाथ
तुम्हारी ओर बढ़ने से पहले
कुछ पल ठहर जाते हैं—
जैसे कोई फ़क़ीर
दुआ माँगने से पहले
आँखें बंद कर ले।
फिर जब मेरी उँगलियाँ
तुम्हारी हथेली को छूती हैं,
तो लगता है
जैसे बरसों से भटकी हुई नदी
आख़िर अपना समुद्र पा गई हो।
तुम्हारी त्वचा पर
मेरी उँगलियों की धीमी आहट
वैसी ही है
जैसे रात की ख़ामोशी में
चाँदनी उतरती है
और किसी सूने आँगन को
बिना आवाज़ के भर देती है।
मैं तुम्हें छूता नहीं—
तुम्हारे भीतर छिपे
उस अनकहे हिस्से को
पढ़ता हूँ,
जिसे शायद
तुमने भी कभी
किसी के सामने पूरा नहीं खोला।
तुम्हारी साँस
जब मेरे क़रीब आकर
थोड़ी ठहरती है,
तो लगता है
जैसे हवा भी जानती हो
कि इस पल को
ज़्यादा तेज़ नहीं गुज़रना चाहिए।
और जब तुम
अपना सिर मेरे सीने पर रख देती हो,
तो मेरी बाँहों का घेरा
अचानक आलिंगन नहीं रहता—
वह एक ऐसी पनाह बन जाता है
जहाँ तुम्हारी सारी थकान
धीरे-धीरे अपने कपड़े उतारकर
ख़ामोशी में सो जाती है।
उस क्षण
मैं तुम्हें पाने की नहीं,
तुम्हें सँभालने की इच्छा करता हूँ—
जैसे कोई
हथेली में रखे हुए दीपक को
हवा से बचाता है।
क्योंकि प्रेम में
सबसे मादक स्पर्श वह नहीं
जो देह को बेचैन कर दे,
सबसे मादक वह है
जिसके बाद स्त्री
अपनी आँखें बंद करके
ख़ुद को सुरक्षित महसूस करे।
तुम्हारे माथे पर
एक धीमा-सा चुंबन रखकर
मैंने जाना—
इबादत में भी शायद
यही होता होगा,
जहाँ होंठ कुछ नहीं कहते
और आत्मा
पूरी तरह झुक जाती है।
फिर तुमने आँखें उठाईं,
और उन आँखों में
जो अधूरी-सी प्यास थी,
उसने मुझे सिखाया—
चाहत को हमेशा
पूरा करना ज़रूरी नहीं होता।
कुछ चाहतें
अधूरी रहकर ही
उम्र भर महकती हैं,
ठीक उस इत्र की तरह
जो कपड़ों से उतर जाने के बाद भी
स्मृति में बसा रहता है।
उस रात
हमारे बीच
शायद बहुत कम हुआ—
कुछ उँगलियाँ मिलीं,
कुछ साँसें ठहरीं,
एक लंबा आलिंगन हुआ,
और बहुत-सा मौन।
लेकिन उसी मौन में
मैंने तुम्हें
पहली बार पूरा छुआ था।
देह से नहीं—
उस जगह तक
जहाँ प्रेम
नाम खो देता है,
स्पर्श
प्रार्थना बन जाता है,
और दो इंसान
कुछ देर के लिए
एक-दूसरे की
इबादत हो जाते हैं।