Nalini Mishra
*भगवान राम के आदर्श आपके जीवन को सुशोभित करे व आपका जीवन राममय बने*।
*रामनवमी की हार्दिक शुभकामनाएँ*।
प्रफुल्ल के नागड़ा (जैन)
किसी जंगल में एक गधा रहता था।
उसने बाकी जीवों से कहना आरंभ कर दिया कि, शेर एक अच्छा राजा नहीं है। उसमें कोई दम नहीं है। संकट काल में वह तुम्हारी मदद नहीं कर पाएगा। अतः तुम सब लोग मुझे अपना राजा मान लो।
इसपर जंगल के सभी जीव हंसने लगे।
गधा अपने आप को बलशाली दिखाने के लिए सुरक्षित अंतर से शेर को गालियां बकने लगा। उस पर भिन्न-भिन्न प्रकार के आरोप लगाने लगा।
गधा शेर को आवाहन करने लगा कि, अगर आप में साहस है, तो मुझसे लड़कर दिखाओ।
कुशल कामकाजी शेर ने गधे की तरफ बिल्कुल ध्यान ही नही दिया और निष्ठापूर्वक अपना काम करता रहा।
थक-हारकर गधा वापस चला गया और फिर बाकी जीवों को बताने लगा कि, शेर तो बिल्कुल कमजोर है। मैंने उसे इतनी गालियां दीं, आवाहन दिया, परंतु वह चुपचाप सुनता रहा।
बकरी, खरगोश जैसे कुछ जीव, जो गधे के उपकार मानते थे, क्योंकि गधा उन्हें भोजन के लिए हरि घास के मैदानों का पता बताता था, वे गधे की हां में हां मिलाने लगे।
गधे के जाने के बाद शेर के महामंत्री ने उससे पूछा :- महाराज! वो गधा आपको इतनी गालियां बकता रहा, आपको लड़ने के लिए आवाहन करता रहा, फिर भी आप चुप क्यों रहे ? आप चाहते, तो पंजे के मात्र एक वार से ही उसका काम समाप्त कर सकते थे। अथवा मुझे आदेश दे देते, तो मैं क्षण भर में उसकी चटनी बना देता। इससे जंगल आपकी धाक भी कायम रहती।
शेर ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया :- गजराज! इसके तीन कारण हैं।
प्रथम कारण :- अगर मैं अथवा आप गधे से लड़ते, तो अन्य जीव यह कहते कि, हमारा राजा तो तानाशाह है। भला गधे जैसे निरीह जीव से भी कोई बुद्धिमान लड़ता है ?
द्वितीय कारण :- लड़ाई में गधा मर जाता, तो उसकी माँ, परिवार वाले और चमचे उसे शहीद बता कर बाकी जीवों की सहानुभूति अर्जित करके उन्हें हमारे विरुद्ध विद्रोह के लिए उकसाते।
तृतीय कारण :- गधे के परिवार को वास्तव लाभ मिलता देख कई अन्य जीव भी शहीद बनने की जुगाड में लग जाते।
मैं उस गधे के अथवा उसके सखाओं के कारण जंगल का राजा अर्थात वनराज नहीं हूं।
न अभिषेको न संस्कार: सिंहस्य क्रियते वने।
विक्रमार्जित सत्वस्य स्वयमेव मृगेन्द्रता।।
अर्थ :- जंगल में सिंह का राज्याभिषेक संस्कार आदि कुछ नहीं किया जाता। उसके पराक्रम के कारण उसे स्वयमेव राज-पद अर्जित हो जाता है।
टिप्पणी :- इस कथा का राजनैतिक अर्थ लगाने के लिए आप पूर्णतः स्वतंत्र हैं।
लवली ठाकुर की वॉल से कॉपी पेस्ट
Mitrangshu Pinaki
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স্কুলে এক শিক্ষক ছাত্রছাত্রীদের বললেন, ভবিষ্যতে তারা কী হতে চায় আর কী হতে চায় না — সে সম্পর্কে লিখতে।
এক ছোট্ট শিশুর উত্তর সবার মুখে হাসি ফোটাল।
তার নিষ্পাপ কল্পনায়, “সিনিয়র সিটিজেন” হওয়াটাই ছিল জীবনের সবচেয়ে আনন্দময় ও মজার সময়! \ud83d\ude04
শিশুটি লিখলঃ
“আমি রাষ্ট্রপতি হতে চাই না,
ডাক্তার হতে চাই না,
বা বিজ্ঞানীও হতে চাই না…
এগুলোর কোনোটাই না।
আমার সবচেয়ে বড় ইচ্ছা হলো একজন সিনিয়র সিটিজেন হওয়া,
কারণ ওটাই সবচেয়ে মজার জীবন বলে মনে হয়!”
কারণ আমার দাদু —
\ud83d\ude04 সকালে দেরি করে ঘুম থেকে উঠতে পারেন।
\ud83d\ude04 যখন খুশি দুপুরে ঘুমিয়ে নিতে পারেন।
\ud83d\ude04 শান্তিতে টিভি দেখেন আর সন্ধ্যাবেলাতেই ঘুমিয়ে পড়েন।
\ud83d\ude04 কোনো হোমওয়ার্ক নেই, পরীক্ষা নেই, টিউশন নেই।
\ud83d\ude04 কাজ না থাকলে গাছের নিচে বসে ঠান্ডা হাওয়া উপভোগ করেন, বা পার্কে গিয়ে বন্ধুদের সঙ্গে দাবা খেলেন।
\ud83d\ude04 যতক্ষণ ইচ্ছে ভিডিও গেম খেলতে পারেন, কেউ বকাবকি করে না।
\ud83d\ude04 সকালে কফি, বিকেলে চা, সন্ধ্যায় দুধ — জীবন একেবারে দারুণ!
\ud83d\ude04 বাসে অনেকে ভালোবেসে সিট ছেড়ে দেয়।
\ud83d\ude04 যা খেতে ভালো লাগে তাই খেতে পারেন, কেউ বাধা দেয় না।
\ud83d\ude04 যা ইচ্ছে তাই করতে পারেন — গান গাওয়া, নাচ, ছবি আঁকা, পিয়ানো বা ট্রাম্পেট বাজানো, পাহাড়ে চড়া বা ট্রেকিং করা।
\ud83d\ude04 আর পকেটে টাকা থাকলে যেখানে খুশি ঘুরতে যেতে পারেন!
“তাই, সিনিয়র সিটিজেন হওয়া সত্যিই অসাধারণ!” \ud83d\ude04
\ud83d\udca1 অনুপ্রেরণা:
অনেক সময় সিনিয়র সিটিজেনরাই বুঝতে পারেন না যে তাঁরা আসলে কতটা সৌভাগ্যবান এবং স্বাধীন।
\ud83c\udf39 গ্রুপে সিনিয়র সিটিজেনদের প্রতি ভালোবাসা ও শ্রদ্ধার সঙ্গে উৎসর্গ করা হলো। \ud83d\ude4f\ud83c\udf39
(সংগৃহীত)
Priyanshu Rai
परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्।
Jayendra singh
(owner)
कोरोना काल में आपकी प्राथमिकता होनी चाहिए की आप कैसे स्वयं को सुरक्षित रख सकते हैं। कोरोना से जुड़ें सभी सुरक्षा नियमों का पालन करें और अपनों से भावनात्मक तरह से जुड़ें रहें।
Rahul Pandey
इस ऐप को अधीक से अधीक लोगों को शेयर करे और फेसबुक को बैन करवाना हैं।
जय भारत