मित्रो आप सभी को जय माँ जय बाबा महाकाल जय श्री राधे कृष्णा अलख आदेश ।।
आप सभी का यहाँ स्वागत है आप... moreमित्रो आप सभी को जय माँ जय बाबा महाकाल जय श्री राधे कृष्णा अलख आदेश ।।
आप सभी का यहाँ स्वागत है आप सभी से निवेदन है कि जितने सदस्य आप यहाँ ऐड कर सकते है करे ओर आप सभी के पास आध्यात्मिक या सनातन धर्म की राह पर किसी को राह दिखा सके तो दिखाईये किसी को राह बताने से बडा कोई धर्म नही होता,,
जय माँ जय बाबा महाकाल जय श्री राधे कृष्णा अलख आदेश आप सभी को,,
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संजीव जैन
"अच्छी थी, पगडंडी अपनी, सड़कों पर तो, जाम बहुत है!!
फुर्र हो गई फुर्सत, अब तो, सबके पास, काम बहुत है!!
नही बचे, कोई सम्बन्धी, अकड़,ऐंठ,अहसान बहुत है!!
सुविधाओं का ढेर लगा है यार, पर इंसान परेशान बहुत है!!\ud83d\udc9e
" गाँव "
Haryanvi Guruji
(owner)
नमस्कार मैं आपको काले धतूरे का प्रयोग बताता हूं अगर आपको काला धतूरा का पौधा कहां से प्राप्त हो जाए तो काले धतूरे के पौधे के साथ काली तुलसी जी एक ही गमले में अगर आप लगाते हैं और अपने घर के अंदर रख लेते हैं तो आपके घर के समस्त वास्तु दोष समाप्त हो जाते हैं लक्ष्मी जी का आगमन शुरू हो जाता है और आपका मकान किसी भी तरह के तांत्रिक अटैक से इम्यून हो जाता है और अगर किसी शुभ नक्षत्र में काले धतूरे की जड़ को अभिमंत्रित करके आप अगर धारण कर लें तो भी यह सारे फायदे आपको मिलने लगते हैं धन्यवाद
Sandeep Kumar
झूठ ने सत्य से कहा, "चलो साथ में नहाते हैं, कुएँ का पानी बहुत बढ़िया है।
सत्य को अभी भी संदेह था, उसने पानी की जाँच की और पाया कि यह वाकई बढ़िया है। इसलिए वे नग्न हो गए और नहाने लगे।
लेकिन अचानक, झूठ पानी से बाहर निकल आया और सत्य के कपड़े पहनकर भाग गया।
सत्य क्रोधित होकर अपने कपड़े वापस लेने के लिए कुएँ से बाहर निकला।
लेकिन दुनिया ने नग्न सत्य को देखकर क्रोध और घृणा से दूर देखा।
बेचारा सत्य कुएँ में वापस आ गया और अपनी शर्म को छिपाते हुए हमेशा के लिए गायब हो गया।
तब से, झूठ सत्य के वेश में दुनिया भर में घूमता है, और समाज बहुत खुश है..... क्योंकि दुनिया को नग्न सत्य को जानने की कोई इच्छा नहीं है।
बहुत दिन तक सत्य कुएं में रहा, फिर ऊब कर बाहर निकला और देखा झूंठ के कपड़े वैसे ही पड़े थे, मरता क्या ना करता, उसने झूंठ के कपड़े पहने और संसार में आ गया, जहां झूंठ सत्य के लिबास में हाजिर था, और सत्य ने चिल्ला चिल्ला कर कहा, मैं सत्य हूं, लेकिन पोशाक से आदमी को पहचानने वाली दुनियां में उसकी एक ना सुनी गई, आज भी जब झूंठ कहता है कि मैं सत्य हूं तो वह सत्य प्रमाणित होता है, और जब सत्य कहता है कि मैं सत्य हूं तो वह झूंठ साबित कर दिया जाता है,
ashu singh
स्वामी विवेकानंद के अनमोल विचार-10
यह जीवन अल्पकालीन है, संसार की विलासिता क्षणिक है, लेकिन जो दुसरों के लिए जीते हैं, वे वास्तव में जीते हैं।
16. एक शब्द में यह आदर्श है कि 'तुम परमात्मा हो।'
17. भगवान की एक परम प्रिय के रूप में पूजा की जानी चाहिए, इस या अगले जीवन की सभी चीजों से बढ़कर।
18. यदि स्वयं में विश्वास करना और अधिक विस्तार से पढ़ाया और अभ्यास कराया गया होता, तो मुझे यकीन है कि बुराइयों और दु:ख का एक बहुत बड़ा हिस्सा गायब हो गया होता।