News Home » Madhya Pradesh » इस डॉक्टर के घर एक महीने बाद गूंजने वाली थीं किलकारियां, पर पत्नी के पेट में उठा जोर का दर्द; तब जो पता चला उसके बाद घर में छा ग

इस डॉक्टर के घर एक महीने बाद गूंजने वाली थीं किलकारियां, पर पत्नी के पेट में उठा जोर का दर्द; तब जो पता चला उसके बाद घर में छा ग

भोपालशहर के एक डेंटल सर्जन के घर किलकारियां गूंजने वाली थीं। लेकिन एक महीने पहले मृत नवजात के पैदा होते ही वो मातम में बदल गईं। तब डॉक्टर पिता ने अपनी लाइफ का सबसे बड़ा फैसला लेते हुए नवजात की बॉडी को एम्स भोपाल को डोनेट कर दी। आइए जानते हैं क्या था ये पूरा मामला....

फैमिली की खुशियां ऐसे बदलीं मातम में...

- ये घटना सितंबर 2018 की है। शहर के डेंटल सर्जन डॉ. प्रशांत त्रिपाठी की पत्नी डॉ. पूजा ने एक मृत नवजात बच्चे को जन्म दिया था। डॉ. प्रशांत के पिता पीके त्रिपाठी ने बताया था कि त्रिलंगा के निजी अस्पताल के डॉक्टर्स ने बहू पूजा की डिलीवरी की तारीख 13 अक्बटूर दी थी।

- उन्होंने कहा कि परिवार में नए मेहमान के स्वागत की तैयारियां चल रहीं थीं। लेकिन बहू के पेट में अचानक जोर का दर्द उठने पर त्रिलंगा के ही निजी अस्पताल की गायनोकोलॉजिस्ट को दिखाया था। तब जांच में जांच में गर्भस्थ शिशु में धड़कन नहीं होने की जानकारी मिली थी।

- उन्होंने बताया था कि इसके बाद से ही बहू अस्पताल में भर्ती थी, फिर डॉक्टर्स ने नार्मल डिलीवरी कराई। लेकिन पता चला कि नवजात मृत था। इसके बाद परिवार की खुशियां मातम में बदल गईं।

डॉक्टर पिता ने किया बॉडी डोनेट करने का फैसला

- मृत नवजात की जानकारी होने पर पिता डेंटल सर्जन डॉक्टर प्रशांत त्रिपाठी ने अपनी लाइफ का बड़ा फैसला लेते हुए फैमिली से बच्चे की बॉडी को डोनेट करने की मंशा जताई। डॉ. प्रशांत के पिता ने बताया कि शुरूआत में बेटे का प्रस्ताव कुछ अटपटा लगा। लेकिन, कुछ ही मिनटों बाद सहमति दे दी।

- तब डॉक्टर प्रशांत ने ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस (एम्स) में गुरुवार को मृत जन्मे नवजात की बॉडी डोनेट कर दी। उन्होंने बताया कि बॉडीको एम्स के यूजी और पीजी स्टूडेंट की पढ़ाई के काम लाया जाएगा।

- भोपाल में ऑर्गन डोनेशन अभियान शुरू करने वाले मोटिवेटर डॉ. राकेश भार्गव का कहना है कि ऐसा देहदान देश में कहीं भी नहीं हुआ। डिपार्टमेंट ऑफ एनॉटामी की प्रमुख डॉ. सुनीता अठावले ने बताया कि एम्स भोपाल में प्रीमेच्योर बच्चे की देहदान हुई। ये एक अनूठा उदाहरण है। इससे पोस्ट ग्रेजुएशन और रिसर्च के स्टूडेंट को पढ़ने में काफी मदद मिलेगी।